Monday, 6 September 2021

Khan Sir Biography In Hindi | Khan GS Research Center

Khan Sir Biography In Hindi

 Khan Sir Biography In Hindi | Khan GS Research Center

बेहतर से बेहतर होने का तलाश करें। मिल जाए नदी तो समुद्र की तलाश करें। टूट जाते है। शीशे पत्थर की चोट से पत्थर टूट जाए ऐसे शीशे तलाश करें। 

Khan sir का जन्म जॉइंट फैमिली में हुआ था। सभी लोग एक साथ रहते थे। Khan sir को परिवार की स्थिति ठीक ना होने की वजह से उन्हें हर चीजें लिमिट में मिली। Khan sir ने अपनी पढ़ाई नॉर्मल स्कूल में की है। जहां पर उन्हें घर से जो पेंसिल मिलती थी। वह बी पेंसिल आती होती थी। Khan sir के स्कूल के सामने एक कॉलेज था वहां यह छुट्टी नक्सल जाया करते थे। यह देखने के लिए कि किसी का वहां पर पेंसिल वगैरह कुछ छुट्टी तो नहीं है। Khan sir के घर पर गाय भैंस भी थी। जिनको वह पालते थे। 

Family Problems

Khan sir के पापा अलग-अलग जगह जाकर काम करने लगे जिसकी वजह से उनके परिवार की स्थिति खराब होने लगी। Khan sir ने जब 8th क्लास पास की अभी से उन्हें सैनिक बनने का सपना देखने लगे थे। कर Khan sir जब 9th में पढ़ रहे थे। तब Khan sir ने आर्मी स्कूल का एंट्रेंस एग्जाम दिया। जिसमें Khan sir का सिलेक्शन नहीं हुआ। जिसके पास Khan sir ने पॉलिटेक्निक में एग्जाम दिया। इसमें अच्छी रैंक नहीं आई जिसकी वजह से उन्होंने सब को छोड़कर 10th करना शुरू किया। 

जिसके बाद Khan sir ने NDA दिया। जिसमें रिटन एग्जाम था जो ठीक-ठाक गया था। Khan sir ने NCC भीगी हुई थी। इसकी वजह से आर्मी के बारे में जानने को मिल गया। कौन सा हथियार किस तरीके से काम करता है। यह भी पता हो गया। Khan sir को लगने लगा था अगर सिलेक्शन हो जाएगा तो ट्रेनिंग की कोई टेंशन ही नहीं है। क्योंकि मुझे ऑलरेडी सब कुछ आता है। लेकिन मेडिकल चेकअप में Khan sir को निकाल दिया गया। क्योंकि Khan sir का हाथ कुछ ज्यादा ही पड़ा था। जिसकी वजह से Khan sir को मेडिकल से निकाल दिया गया। 

Khan Sir Dream

Khan sir का शुरू से सिर्फ एक ही सपना था कि उन्हें सैनिक पढ़ना है। इसके आगे Khan sir ने कोई सपना ही नहीं देखा था। Khan sir को दिक्कत आने लगी और साथी शास्त्र घर की स्थिति पीटेगा लेने गए। अब Khan sir ने 10th के बाद 12th की 12th करने के बाद Khan sir ने BSC कंप्लीट की। इसमें कोई वैकेंसी नहीं थी जिसकी वजह से फिर से दिक्कत आना शुरू हो गई। इन दिक्कतों में Khan sir का साथ उनके तीन दोस्तों ने दिया। इन दोस्तों को घर से जो पॉकेट मनी मिलती थी। उनमें से थोड़ा-थोड़ा बचाकर खान सर को दे देते थे। 

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इन सब ने मिलजुल कर एक दूसरे का साथ दिया। यह चारों मिलकर पढ़ाई करते थे। और चारों को आर्मी में जाना था। Khan sir के दोस्त ने उन्हें एक होम ट्यूशन पर भेज दिया। Khan sir जिस लड़के को पढ़ाते थे। वह अपने स्कूल में टॉप पर आने लगा। जिसकी वजह से बच्चे के घर वाले काफी खुश थे। जिसके बाद Khan sir को एक ट्यूशन में ले गए। जहां पर कुछ बच्चे पढ़ते थे। पहले दिन Khan sir को 6 बच्चे मिले। धीरे-धीरे करके कोचिंग में बच्चे पढ़ने लगे और कोचिंग वाले को लगने लगा हां इसमें पैसा आ रहा है। 

Students Support

कोचिंग वाले ने Khan sir को कहा। आपको नाम पता एड्रेस मोबाइल नंबर कुछ भी नहीं देना है। Khan sir ने कहा ठीक है। कोई बात नहीं जिसके बाद उनके टाइटल की वजह से उन्हें Khan sir कहने लगे। धीरे-धीरे Khan sir वहां पर पढ़ाने लगे। वहां पर कोचिंग वालों को सिर्फ पैसा दिखता था। Khan sir को बच्चों का कैरियर दिखता था। कोचिंग वालों ने कहा तुम इतना कम पैसे में इतना क्यों बताते हो जिसकी वजह से Khan sir की उनसे बहस हो गई और उन्हें कोचिंग छोड़ना पड़ी‌। 

जिसके बाद Khan sir पटना चले गए। वहां पर कुछ लोगों के साथ मिलकर कोचिंग शुरु की। लेकिन 6 महीने बाद उनके पार्टनर रोना उनसे वह कोचिंग हड़प पीली। और उनके पास कुछ नहीं छोड़ा उनके पास सिर्फ जेब में ₹40 ही थे। कहां से Khan sir के घर जाने में ₹90 लगते थे। लेकिन उनके पास तो सिर्फ ₹40 ही थे। जिसकी वजह से उनका दिमाग काम नहीं कर रहा था और फिर वह गंगा के किनारे बैठे हुए थे। जिसके बाद Khan sir अपने रूम पर गए। वहां पर कोई भी दरवाजा नहीं खोल रहा था। थोड़ी देर बाद गेट खोलो और पूछा कहां थे। Khan sir ने कहा यहीं पर तो उनसे पूछा कितना टाइम हो रहा है Khan sir ने कहा 7-8 बज रहे होंगे जिसके बाद उन्हें खड़ी देखी और देखा 2:30-3:00 बज रहे थे। क्योंकि टेंशन की वजह से उन्हें कुछ भी याद नहीं था। जिसके बाद,

Trust

Khan sir समझ गए। कि मुझे कुछ अपना करना है। किसी पर भी आंख बंद करके भरोसा नहीं करना क्योंकि सब एक जैसे नहीं होते। जिसके बाद Khan sir ने अपनी कोचिंग खोली जहां पर बच्चे पढ़ने लगे कुछ बच्चे पैसा नहीं दे पाते थे। लेकिन Khan sir को पैसे से कोई मतलब नहीं था। बल्कि उन बच्चों की जिंदगी बनाने से मतलब था। कुछ दिनों बाद Khan sir के कोचिंग पर बम चल रहे है। हर जगह अफरा तफरी मची हुई है। कहां पर इतनी तबाही हो गई कि उन्हें लगने लगा हमें आपसे छोड़कर कहीं और जाना चाहिए। लेकिन बच्चों ने कहा Khan sir आप हिम्मत मत हारिए। Khan sir की कोचिंग के अलावा वहां पर 17 और कोचिंग ए थी उनको जीवो के शटर बंद सारी कोच ने बंद हो गई थी। 

लेकिन Khan sir पर उनके स्टूडेंट आए और कहा आप कोचिंग खोलिए हम कोचिंग पढ़ने आएंगे। यहां पर सबसे ज्यादा Khan sir को बच्चों ने ही सपोर्ट किया। जिसके बाद धीरे धीरे कर के Khan sir ने एक लाइब्रेरी बनाई जो पटना की सबसे बड़ी लाइब्रेरी बन गई। उसके बाद सब कुछ सही हो गया बच्चों का अच्छा रिजल्ट आने लगा। 

Online Classes

लेकिन कुछ समय पर कोरोना की वजह से Khan sir की कोचिंग बंद हो गई और सब कुछ घर के अंदर हो गया। जिसके बाद Khan sir को पता चला कि उन्हें ऑनलाइन पर आना पड़ेगा। लेकिन Khan sir को यही फेसबुक चलाना नहीं आता ना ही उन्हें यह पता था टेलीग्राम और व्हाट्सएप एक जैसा होता है। और ऑनलाइन की खबर सुनकर सर को डर लगने लगा। कि मैं कैसे पड़ा पाऊंगा। लेकिन Khan sir के दोस्त कि गांव में फोटोकॉपी की दुकान थी। जहां पर Khan sir ने अपनी ऑनलाइन क्लास देनी शुरू की। पुलिस का सायरन सुनने के बाद सटल लगाकर बंद करने देते दुकान को जिसकी वजह से स्टूडेंट Khan sir से कहते थे। यह आप कैसे वीडियो बना रहे हो ना लाइट सही है। ना कुछ सुनाई दे रहा है। क्योंकि Khan sir का सारा सेटअप पटना में रह गया था। और गांव में ऐसी व्यवस्था भी नहीं थी। 

Khan sir को अपना सामान लेने आना था। पटना जिसके बाद वह ट्रक के क्लीनर बनकर पटना पहुंचे खुद सामान चढ़ाया जिसके बाद वह अपने गांव लेकर आ गए। लेकिन Khan sir को यह नहीं पता था कि स्टेडियो कैसे बनता है। इसके बाद उन्होंने बांस लेकर ट्यूबलाइट बांध के सेटअप जमा कर पढ़ाना शुरू कर दिया। जिसके बाद लोग धीरे-धीरे Khan sir का पढ़ाना पसंद करने लगे। कुछ दिन बाद Khan sir के दोस्त आए। और अन्य उनकी लाइटिंग और सेटअप को ठीक कर दिया जिसके बाद Khan sir को और अच्छे से पढ़ाने में मदद मिली। जिसके बाद Khan sir ने अपना पढ़ाना शुरू कर दिया। 

A Through

यह दुख यह गम यह तकलीफ तेरे ही अंदर है। तू खुद के बनाए पिंजरे से बाहर निकल कर तो देख। तू अपने आप में एक सिकंदर है।

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